
अमेरिका-ईरान सीजफायर: कमजोर मध्यस्थता से कभी भी उल्लंघन
अमेरिका-ईरान सीजफायर हालातों को देखकर लगता नहीं की ज्यादा आगे जाएगा। पाकिस्तान की कमजोर मध्यस्थता, ईजराइल, अमेरिका-ईरान के तेवर इसे युद्ध की ओर ले जाते दिख रहे।

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अमेरिका-ईरान सीजफायर में अहम भूमिका में सामने आए पाकिस्तान की बात न तो आमेरिका, इजराइल मान रहे है और न ईरान। सीजफायर की शर्तें ईरान कुछ बता रहा है और अमेरिका-इजराइल कुछ। सीजफायर के बाद न तो हमले रुके हैं और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। साथ ही यूएई ने इस सीजफायर के बीच ईरान पर हमले भी किए हैं। इससे एक चौथे देश की युद्ध में सीधी दखल हुई है। आज यानि शुक्रवार को पाकिस्तान में समझौता बैठक होनी है, लेकिन बताया जाता है कि इसका इजराइल ने विरोध किया है। ऐसे में साफ नजर आता है कि पाकिस्तान ने सिर्फ संदेश वाहक का काम किया, क्योंकि मध्यस्थता तभी संभव है जब मध्यस्थ की बात देश माने यानि कुछ दबाव हो। लेकिन यहां ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा। और अब तो इजराइल पाकिस्तान पर ही भड़क गया है। ऐसे में इस सीजफायर का उल्लंघन कभी भी संभव है।
पाकिस्तानी की इजराइल ने की कड़ी निंदा
अमेरिका-ईरान सीजफायर में अहम बन रहे पाकिस्तान की इजराइल ने कड़े शब्दों में निंदा की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इजराइल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की 'बेहद आपत्तिजनक' टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए 'तटस्थ मध्यस्थ' के रूप में उनके देश की भूमिका पर संदेह जताया है। इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार शाम 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजराइल के विनाश का आह्वान बेहद आपत्तिजनक है।' इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, 'यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर ऐसी सरकार से जो शांति के लिए स्वयं के एक निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करती है।' अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम में मध्यस्थता करने का श्रेय पाकिस्तान को दिया जाता है और वह सप्ताहांत में शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक 'पोस्ट' में इजराइल को 'बुरा' और 'मानवता के लिए अभिशाप' बताया। आसिफ ने यह भी कहा, 'इस्लामाबाद में शांति वार्ता जारी है जबकि लेबनान में नरसंहार किया जा रहा है।' उन्होंने कहा, 'निर्दोष नागरिकों को इजराइल द्वारा मारा जा रहा है, पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में रक्तपात बेरोकटोक जारी है।' उन्होंने कहा, 'मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फलस्तीनी जमीन पर इस 'कैंसर जैसे देश' को बनाया, वे नरक में जलें।' जरा सोचिए जब मध्यस्थ देश पाकिस्तान के साथ इजराइल की ऐसी तल्खी है तो क्या ये देश मध्यस्थता करवा सकता है।
ट्रंप ने जताई युद्ध विराम समझौते के प्रभावी होने पर आशंका
अमेरिका-ईरान सीजफायर को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद भी आशंकित हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते के प्रभावी होने को लेकर आशंका जताई है। ट्रंप ने गुरुवार शाम को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'ईरान बहुत खराब काम कर रहा है। ईरान तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने देने के संदर्भ में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे शर्मनाक कहेंगे।' उन्होंने कहा, 'हमारे बीच ऐसा कोई समझौता नहीं है।' इस पोस्ट से पहले ट्रंप ने एक और पोस्ट में कहा था, 'ऐसी खबरें हैं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क वसूल रहा है - उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए और अगर वे ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें अभी इसे बंद कर देना चाहिए!' अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने युद्धविराम समझौते के तहत जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का समर्थन किया है, लेकिन उसका कहना है कि ट्रंप ईरान की सेना का विरोध करते हैं जो जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है। यानि अमेरिका, इजराइल दोनों देश का रूख किसी भी तरह युद्ध विराम की ओर नहीं नजर आ रहा।
ईरान ने नहीं खोला होर्मुज जलडमरूमध्य
अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला है। बल्कि युद्ध के दौरान जितने जहाज वहां से निकल रहे थे उनमें भी कमी आई है। साथ ही यूएई सहित अन्य देशों पर उसने हमले तेज कर दिए हैं। ऐसे में किसी भी तरह से यह नहीं लगता कि सीजफायर आगे चल पाएगा।

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